दिए गए गद्यांश को ध्यान से पढ़े और प्रश्न के उत्तर दें।
डॉ. रामकुमार वर्मा ने ऐतिहासिक एवं समस्यामूलक एकांकियों की रचना की है। उनके एकांकियों का मूल स्वर आदर्शवादी है। प्रेम, सेवा, उदारता, त्याग और बलिदान की भावनाओं से ओतप्रोत इन ऐतिहासिक एकांकियों में भारत के अतीत गौरव को प्रस्तुत करते हुए राष्ट्रीयता की भावना जगाने का प्रयास किया गया है। समस्यामूलक एकांकियों में वर्मा जी ने शिक्षित मध्यमवर्गीय दंपतियों की अनेक समस्याओं प्रेम, सहवास, संदेह, दंभ आदि को कथानक का विषय बनाया है, किंतु उनकी परिणति आदर्श में हुई है क्योंकि उनकी एकांकियों की नायिकाएं अंततः अपने पति के सम्मान की रक्षा करती हुई दिखाई पड़ती हैं, यथा ‘रेशमी टाई’, ‘ललिता’ और ‘एक्ट्रेस’ एकांकी की नायिका प्रभाव कुमारी। अतिशय आदर्शवाद के कारण वर्मा जी के एकांकी यथार्थ से दूर हो गए जान पड़ते हैं, किंतु एकांकी शिल्प की दृष्टि से वे हिंदी के युग प्रवर्तक एकांकी माने जा सकते हैं। आरंभ, कुतूहल, संकलन त्रय, चरम सीमा आदि तत्व उनके एकांकियों में बड़ी सूक्ष्मता से विद्यमान हैं। रंगमंचीयता एवं अभिनेयता के गुणों से भी उनके एकांकी संपन्न हैं तथा उनमें सरसता के साथ-साथ शिल्प की प्रौढ़ता भी विद्यमान है। वस्तुतः एकांकी कला को चरम पर पहुंचाने का श्रेय डॉ रामकुमार वर्मा को ही दिया जाता है।
निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द ‘सम्मान’ का पर्यायवाची नहीं है?
- Aसरंजाम
- Bप्रतिष्ठा
- Cआदर
- Dआवभगत